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Read more: Sanātan Satya ke Sūtra
सनातन सत्य के सूत्र हम अक्सर यह चर्चा करते हैं कि भारतीयता का आधार सनातन सत्य है। उस सत्य की झलक हमें हमारे सनातन साहित्य में सहज ही मिल जाती है। वैसे तो सम्पूर्ण साहित्य का अध्ययन इस आलोक में…
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Maulikta ki or Prerit Karta Ecosystem
Read more: Maulikta ki or Prerit Karta Ecosystemमौलिकता की ओर प्रेरित करता इकोसिस्टम हम दायरों में रहने के आदी हो चुके हैं। जो भी चला आ रहा है, उसी के अनुसार चलते रहना हमारी स्वाभाविक प्रवृत्ति बन गई है। “अधिक प्रयास मत करो,” यही हमारा अवचेतन संदेश…
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‘Aagé baṛhnā’ kya hai?
Read more: ‘Aagé baṛhnā’ kya hai?‘आगे बढ़ना’ क्या है? मैंने 19 वर्षों तक मुख्यधारा की परियोजनाओं में काम किया। दिन-भर की व्यस्तता, अनगिनत ईमेल, फोन कॉल और असंख्य चर्चाएँ… लेकिन यह सब किस लिए? मैं खुद से पूछता था – क्या मैं सही दिशा में…
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Sanātana
Read more: Sanātanaसनातन का अर्थ है “Eternal and Perennial Truth”— शाश्वत और सतत सत्य। कृष्णमूर्ति के शब्दों में, यह “What Is” है। It is a given. You can’t do anything about it. इसलिए इसमें तर्क नहीं है। यह तो बस है। जैसा…
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Arth ka Anubhav aur Shabd Part – 2
Read more: Arth ka Anubhav aur Shabd Part – 2अर्थ का अनुभव और शब्द – भाग-2 पिछले सप्ताह के ब्लॉग में मैंने ‘अर्थ का अनुभव और शब्द’ पर अपने विचार साझा किए। मैं उस समय यह देख पा रहा था कि अर्थ को हम स्वयं के भीतर देखते हैं…
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Arth ka Anubhav aur Shabd
Read more: Arth ka Anubhav aur Shabdअर्थ का अनुभव और शब्दजब मनुष्य के बीच भाषा विकसित हो रही होगी, तब वस्तुओं और क्रियाओं के नामकरण अपने-अपने स्तर पर हो रहे होंगे। नामकरण से पहले भी ये सभी वस्तुएँ और क्रियाएँ अस्तित्व में रही ही होंगी। मनुष्य…
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Maanyataaye aur Jadata
Read more: Maanyataaye aur Jadataमान्यताएं और जड़ता सूर्य एक स्थान पर स्थिर है और पृथ्वी उसकी परिक्रमा कर रही है। साथ ही, वह अपनी धुरी पर भी समान गति से घूम रही है। यह हम सभी जानते हैं। पृथ्वी और सूर्य की यह स्थिति…
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Anubhava and Maanyataaye
Read more: Anubhava and Maanyataayeअनुभव और मान्यताएं अनुभव को मान्यताओं से अलग रखना जरूरी है, अन्यथा अनुभव पर बहुधा मान्यताएं हावी हो जाती हैं। मान्यताएं अपनी memory में होती हैं, विगत से आती हैं। अनुभव वर्तमान में होता है फिर वह हमारी मान्यता बन…
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INVOCATION
Read more: INVOCATIONQ&A with Sri Ramana Maharshi (Master) Is there any way of adoring the Supreme which is all, except by abiding firmly as that! Disciple: Master! What is the means to gain the state of eternal bliss, ever devoid of misery? Master: Apart from…
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DrishtiKon (Approach)
Read more: DrishtiKon (Approach)साधारण भारतीय दृष्टिकोण साधारण भारतीय व्यक्ति का दृष्टिकोण, उसके जीवन में गहराई से जमीं हुई मान्यताओं से संचालित होता है। इन मान्यताओं को लेकर उसमें न तो कोई ग्लानि होती है और न ही कोई दंभ। उसके लिए मानना या…
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‘Effort’
Read more: ‘Effort’J. Krishnamurti IT BEGAN TO rain gently enough, but suddenly it was as though the heavens had opened and there was a deluge. In the street the water was almost knee-deep, and it was well over the pavement. There was…
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Jatiltaoun Se Mukt ‘Mai’
Read more: Jatiltaoun Se Mukt ‘Mai’जटिलताओं से मुक्त ‘मैं’ बहुत पहले ‘संवाद की कला’ पर एक लेख पढ़ा था। उस लेख की पहली पंक्ति आज भी मुझे याद रहती है, “आप जिसके साथ संवाद स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं, वह किसी अन्य वस्तु…
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